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गुरुग्राम में विभाजन विभीषिका कार्यक्रम में राव इंद्रजीत सिंह का फूटा गुस्सा

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Sahil Manchanda

Published on Aug 14, 20264 min read

गुरुग्राम में विभाजन विभीषिका कार्यक्रम में राव इंद्रजीत सिंह का फूटा गुस्सा
विभाजन विभीषिका कार्यक्रम के दौरान राव इंद्रजीत सिंह ने आयोजकों पर नाराजगी जताई और निमंत्रण को लेकर सवाल उठाते हुए भाषण अधूरा छोड़ मंच से चले गए।
Gurugram- सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय विभाजन विभीषिका कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री और गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने मंच से अपनी ही पार्टी के आयोजकों पर जमकर नाराजगी जताई। कार्यक्रम में उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब राव इंद्रजीत सिंह ने स्थानीय सांसद को निमंत्रण नहीं दिए जाने को लेकर सवाल उठाए और अपना भाषण पूरा किए बिना ही मंच छोड़कर चले गए।

राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कार्यक्रम में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया गया, लेकिन स्थानीय सांसद को ही कार्यक्रम से दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के बुलाने पर ही वह कार्यक्रम में पहुंचे हैं। राव इंद्रजीत ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब दूसरे लोकसभा सांसदों को निमंत्रण दिया गया, तो स्थानीय सांसद को क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इसलिए नजरअंदाज किया गया क्योंकि वह पंजाबी नहीं हैं


राव इंद्रजीत सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में सवाल किया कि अगर उन्हें निमंत्रण नहीं दिया गया था तो क्या उनका इस कार्यक्रम में आना उचित था। उन्होंने पानीपत और करनाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर इसी तरह का कार्यक्रम उन जिलों में आयोजित होता, तो क्या वहां के स्थानीय सांसदों को निमंत्रण नहीं दिया जाता? उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम केवल किसी विशेष समुदाय का होता, तो वह बिना निमंत्रण के नहीं आते, लेकिन जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बुलाकर कार्यक्रम को राजनीतिक रूप दिया गया और राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें बुलाया, तब वह यहां पहुंचे हैं।


राव इंद्रजीत ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उन्हें इस मंच से राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत करने का अवसर भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में दूसरे राज्यों से अतिथियों को बुलाया गया, लेकिन स्थानीय लोगों और स्थानीय सांसद को ही आमंत्रित नहीं किया गया, जिस पर उन्हें आपत्ति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की बात कही थी और वह भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के बुलावे पर कार्यक्रम में पहुंचे हैं।


अपने संबोधन के दौरान राव इंद्रजीत सिंह ने पंजाबी समाज के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह पंजाबियों का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने उन्हें छह बार सांसद बनाकर संसद भेजा। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय बड़ी संख्या में लोग पंजाब जाने के बजाय हरियाणा आए और हरियाणा के लोगों ने उनका स्वागत किया। राव इंद्रजीत ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति को समृद्ध करने में पंजाबियों का भी बड़ा योगदान रहा है।


उन्होंने कहा कि हरियाणा ऐसा प्रदेश रहा है, जहां पंजाबी समाज के नेताओं को भी महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने सेना में हरियाणा के योगदान का जिक्र करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग और लेफ्टिनेंट जनरल कपूर का उदाहरण दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि समाज और राजनीति में किसी एक समुदाय के योगदान को अलग करके नहीं देखा जा सकता।


राव इंद्रजीत सिंह ने मंच से पंजाबी समाज को संबोधित करते हुए कहा कि ताली दोनों हाथों से बजती है। उन्होंने धर्मबीर गाबा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें विधायक बनाने में सभी समाजों का योगदान रहा। उन्होंने कहा कि केवल पंजाबी नाम या पहचान के आधार पर चुनावी राजनीति नहीं चलती, बल्कि सभी वर्गों के सहयोग से ही कोई व्यक्ति चुनाव जीतता है।

कार्यक्रम के दौरान राव इंद्रजीत सिंह ने भाजपा कार्यकर्ताओं और मौजूद लोगों से पार्टी के साथ जुड़े रहने की अपील भी की। 


इसी बीच मंच पर मौजूद एक सेवानिवृत्त जनरल ने उन्हें रोकने के लिए उनका कुर्ता खींचा। इस पर राव इंद्रजीत ने हल्के व्यंग्य में कहा कि कुर्ता खींचने वाले जनरल साहब आ गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले तो उन्हें बुलाया ही नहीं गया था और अब बुला लिया गया, यही गनीमत है।

इसके बाद राव इंद्रजीत सिंह ने अपना संबोधन बीच में ही समाप्त किया और मंच छोड़कर चले गए। उनके इस तेवर के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई और कार्यक्रम के दौरान पार्टी के भीतर स्थानीय स्तर पर चल रही नाराजगी भी खुलकर सामने आती दिखाई दी।

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