गुरुग्राम को जलभराव से बचाने के लिए स्काडा तकनीक और अंडरग्राउंड टैंक का होगा इस्तेमाल

गुरुग्राम में जलभराव के स्थायी समाधान के लिए SCADA तकनीक, अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और हाई-कैपेसिटी इंजेक्शन वेल विकसित किए जाएंगे।
Gurugram- हर साल बारिश के बाद होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अब काम तेज कर दिया गया है। इसी कड़ी में बुधवार को आईआईटी गांधीनगर के प्रोफेसर विवेक कपाड़िया और प्रोफेसर उदित भाटिया ने एमसीजी और जीएमडीए अधिकारियों के साथ शहर के जलभराव प्रभावित इलाकों का दौरा किया।आईआईटी टीम ने सेक्टर-46, सेक्टर-47 और आसपास के अन्य क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने टीम को पानी के संग्रहण, निकासी और जलभराव के प्रमुख कारणों की जानकारी दी।
निरीक्षण के दौरान जलभराव वाले स्थानों पर हाई कैपेसिटी अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और इंजेक्शन वेल विकसित करने की योजना पर चर्चा हुई। योजना के तहत बारिश के दौरान जमा होने वाले पानी को पहले स्टोरेज टैंक में इकट्ठा किया जाएगा और इसके बाद इंजेक्शन वेल के जरिए पानी को जमीन के भीतर पहुंचाया जाएगा।प्रस्तावित इंजेक्शन वेल की क्षमता 48 से 80 लीटर प्रति सेकंड तक होगी। इसका उद्देश्य कम समय में ज्यादा मात्रा में बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है, ताकि सड़कों और निचले इलाकों में लंबे समय तक पानी जमा न रहे।
इस पूरी व्यवस्था को गुरुग्राम की स्थानीय परिस्थितियों और जलभराव वाले क्षेत्रों के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर स्टोरेज टैंक की क्षमता और इंजेक्शन वेल की क्षमता तय करने का काम किया जा रहा है।इस स्मार्ट जल प्रबंधन व्यवस्था में SCADA तकनीक का इस्तेमाल करने की भी योजना है। इसे सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड से लिंक किया जाएगा, जिससे जलस्तर और पानी से जुड़े आंकड़ों की निगरानी और तकनीकी विश्लेषण किया जा सकेगा।
निरीक्षण के दौरान एमसीजी अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका, पार्षद कुलदीप यादव और जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता अमित गोदारा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।एमसीजी और जीएमडीए का लक्ष्य केवल बारिश के दौरान पानी निकालना नहीं, बल्कि गुरुग्राम में जलभराव की समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान तैयार करना है। स्टोरेज टैंक और हाई कैपेसिटी इंजेक्शन वेल की योजना इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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